जीवन बचाना है, पर्यावरण बचाना है, तो समय चक्र को अपनी गति से चलने दो।
संसार में जितने भी जीव-जंतु, वृक्ष-लताएँ हैं उनकी उत्पति कैसे हुई ,कब हुई , कहाँ से हुई इन सब बातों का पता लगाना आसान नहीं है,और न ही पता लगाया जा सकता है। क्यूंकि हम सब इस दुनिया में बाद में आये हैं और जो वास्तु विलुप्त हो चुकी है उसे कैसे खोजेंगे। क्या कोई अपने पूर्वजों , माँ -बाप भाई- बहन को खोज सकता है उन हजारों विलुप्त प्राणियों ,वनस्पतियों जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते वे देखने में कैसे होते होंगे । आज के आधुनिक युग में हम पदार्थों का सिर्फ विशलेषण कर सकते हैं,सटीक हम कुछ भी नहीं बता सकते। संसार में हर स्थूल व सूक्ष्म चीजों चाहे वह प्राणी हो या पदार्थ उसका परिवर्तन निश्चित है , तथा हर एक का समय भी निश्चित है। संसार में आने ,जाने , बनने, बिगड़ने का, कोई तो शक्ति है जहाँ मनुष्य नहीं पहुँच सका । क्या आप सोंच सकते हैं एक ही पृथ्वी पर रहने वाले जीवों का जन्म व मरण का समय अलग-अलग निश्चित है, जैसे कुत्ते का जन्म ३ माह में, बकरी ६ माह, गाये व इंसान ९ माह, हांथी १८ महीने में जन्म लेता है। उसी प्रकार मृत्यु का भी समय निश्चित है और यदि समय से पहले कोई चीज प्राप्त की जाये तो वह बिगड़ जाती है, कुम्हार जब मिटटी का बर्तन बनता है तो घूमते हुए चाक पर उस वस्तु का समय निश्चित होता है उसी के अनुसार कुलड़, मटकी, सुराही बनती है तथा इनके पकने का समय भी निश्चित होता है। यदि समय से पहले निकालेंगे तो आधा-अधूरा व काला पड़ जायेगा , समय के बाद निकालेंगे तो ज्यादा तप कर टेड़ा-मेंडा हो जायेगा यही क्रिया जीव ,जंतु तथा मनुष्य पर भी लागू होती है। और जीवन के लिए अग्नि तत्व महत्वपूर्ण है यह अग्नि तत्व ही जीवात्मा है, जितना शक्तिशाली यह तत्व होगा उतना ही अच्छा जीवन उत्पन्न होगा, और कुम्हार का घड़ा भी मजबूत होगा। जितना अच्छा सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर आयेगा हरियाली व समृद्ध बढेगी। सब कुछ यदि समय के अनुसार होना चाहिए,आज इंसान चीजों के आगे आगे भाग रहा है, वह पहले ही सब कुछ पा लेना चाहता है। क्या आगे भागने से कोई चीज प्राप्त हो सकती है वह चीज तो तुम्हारे पीछे है, यदि वह तुम्हारे उपयोग की है तो लो नहीं तो छोड़ दो । ...............
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