सोमवार, 21 जून 2010

कानपुर

कानपुर शायद दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर हो यहाँ की आवो हवा इतनी ख़राब हो चुकी है, की जीना मुस्किल गो गया  है। एक समस्या हो तो गिनाई जाये यहाँ तो समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है, हवा जहरीली हो चुकी है,पाताल तक पानी प्रदूषित हो गया है। कुछ साल ऐसे ही रहा तो यहाँ की मिट्टी बीज बोने लायक नहीं रहेगी। जब किसी घने पेड़ों के झुण्ड के पास से गुजरते हैं तो ठंडक का अहसाश होता है, सुकून मिलता है, परन्तु वैसे हवा तक गर्म महशूस होती है, आँखों में जलन होती है, शुद्ध पानी तो वैसे ही ३०० फीट नीच जा चुका है।  कुछ साल बाद पीने को पानी मिलना मुश्किल लगता है, गंगा मैया ,जीवन दायिनी कानपुर आने के बाद गंदे नाले में तब्दील हो जाती हैं। पानी के प्रदूषित हो जाने से हजारों हेक्टर भूमि खेती लायक नहीं रही  जो भी सब्जी की फसल होती है। वह सब्जियां खाने लायक नहीं होती, उनमे हानिकारक तत्व अवशोषित होने  के कारण  कई प्रकार की बीमारी हो रहीं हैं।
कानपुर की सीवर व्येवस्था अंग्रेजों के ज़माने की है वेह ध्वस्थ हो चुकी है, पूरे शहर में गंदा सीवर का पानी नजर आता है। सड़के भी पुराने समय की बनी है कई कई बार बना चुके पर चौड़ी कभी नहीं हुई, जबकि आबादी ५ गुना हो गई। जाम की विकट समस्या, सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट में रोज औसतन ५ दुर्घटनाएं होती हैं। बिजली की समस्या ?  टैक्स चुकाने में अव्वल नंबर पर आने वाला शहर, सबसे ज्यादा राजस्व चुकाने वाला शहर, इतना पिछड़ा क्यूँ ? बताने की जरूरत नहीं है कानपुर क्या था क्या हो गया, और क्या होगा।
यहाँ के नेता सिर्फ मू से बक चक करते है, शहर को कूड़ा बना दिया, खुद भी मिटेंगे दूसरों को भी मिटायेंगे  कसम खा रखी है विकाश नहीं विनाश की।

बुधवार, 9 जून 2010

जीवन

 जीवन बचाना है, पर्यावरण बचाना है, तो समय चक्र को अपनी गति से चलने दो।
संसार में जितने भी जीव-जंतु, वृक्ष-लताएँ  हैं उनकी उत्पति कैसे हुई ,कब हुई , कहाँ से हुई इन सब बातों का पता लगाना आसान नहीं है,और न ही पता लगाया जा सकता है। क्यूंकि हम सब इस दुनिया में बाद में आये  हैं और जो वास्तु विलुप्त हो चुकी है उसे कैसे खोजेंगे। क्या कोई अपने पूर्वजों , माँ -बाप  भाई- बहन  को खोज सकता है उन हजारों विलुप्त प्राणियों ,वनस्पतियों जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते वे देखने में कैसे होते होंगे । आज के आधुनिक युग में हम  पदार्थों का सिर्फ  विशलेषण कर सकते हैं,सटीक हम कुछ भी नहीं बता सकते। संसार में हर स्थूल व सूक्ष्म चीजों चाहे वह प्राणी हो या पदार्थ उसका परिवर्तन निश्चित है , तथा हर एक का समय भी निश्चित है। संसार में आने ,जाने , बनने, बिगड़ने का, कोई तो शक्ति है जहाँ मनुष्य नहीं पहुँच सका । क्या आप सोंच सकते हैं एक ही पृथ्वी पर रहने वाले जीवों का जन्म व मरण का समय अलग-अलग निश्चित है, जैसे कुत्ते  का जन्म ३ माह में, बकरी ६ माह, गाये व इंसान ९ माह, हांथी १८ महीने में जन्म लेता है।  उसी प्रकार मृत्यु का भी समय निश्चित है  और यदि समय से पहले  कोई चीज प्राप्त की जाये तो वह बिगड़ जाती है, कुम्हार जब मिटटी का बर्तन बनता है तो घूमते हुए चाक पर उस वस्तु का समय निश्चित होता है उसी के अनुसार कुलड़, मटकी, सुराही बनती है तथा इनके पकने का समय भी निश्चित होता है। यदि समय से पहले निकालेंगे तो आधा-अधूरा व काला पड़ जायेगा , समय के बाद निकालेंगे तो ज्यादा तप कर टेड़ा-मेंडा  हो जायेगा यही क्रिया जीव ,जंतु तथा मनुष्य पर भी लागू होती है। और जीवन के लिए अग्नि तत्व महत्वपूर्ण है यह अग्नि तत्व ही जीवात्मा है, जितना शक्तिशाली  यह तत्व होगा उतना ही अच्छा जीवन उत्पन्न होगा, और कुम्हार का घड़ा भी मजबूत होगा। जितना अच्छा सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर आयेगा हरियाली व समृद्ध बढेगी। सब कुछ यदि समय के अनुसार होना चाहिए,आज इंसान चीजों  के आगे आगे भाग रहा है, वह पहले ही सब कुछ पा लेना चाहता है। क्या आगे भागने से कोई चीज प्राप्त हो सकती है वह चीज तो तुम्हारे पीछे है, यदि वह तुम्हारे उपयोग की है तो लो नहीं तो छोड़ दो । ............... 

सोमवार, 7 जून 2010

पर्यावरण

पृथ्वी को बचाना है , जीवन को बचाना है , सभ्यता को बचाना है, सबसे महत्त्वपूर्ण  हवा व पानी को बचाना है तो हर इंसान एक वृक्ष अवश्य लगाये, क्यूंकि वृक्ष से जल- जीवन-जमीन है /