कानपुर शायद दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर हो यहाँ की आवो हवा इतनी ख़राब हो चुकी है, की जीना मुस्किल गो गया है। एक समस्या हो तो गिनाई जाये यहाँ तो समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है, हवा जहरीली हो चुकी है,पाताल तक पानी प्रदूषित हो गया है। कुछ साल ऐसे ही रहा तो यहाँ की मिट्टी बीज बोने लायक नहीं रहेगी। जब किसी घने पेड़ों के झुण्ड के पास से गुजरते हैं तो ठंडक का अहसाश होता है, सुकून मिलता है, परन्तु वैसे हवा तक गर्म महशूस होती है, आँखों में जलन होती है, शुद्ध पानी तो वैसे ही ३०० फीट नीच जा चुका है। कुछ साल बाद पीने को पानी मिलना मुश्किल लगता है, गंगा मैया ,जीवन दायिनी कानपुर आने के बाद गंदे नाले में तब्दील हो जाती हैं। पानी के प्रदूषित हो जाने से हजारों हेक्टर भूमि खेती लायक नहीं रही जो भी सब्जी की फसल होती है। वह सब्जियां खाने लायक नहीं होती, उनमे हानिकारक तत्व अवशोषित होने के कारण कई प्रकार की बीमारी हो रहीं हैं।
कानपुर की सीवर व्येवस्था अंग्रेजों के ज़माने की है वेह ध्वस्थ हो चुकी है, पूरे शहर में गंदा सीवर का पानी नजर आता है। सड़के भी पुराने समय की बनी है कई कई बार बना चुके पर चौड़ी कभी नहीं हुई, जबकि आबादी ५ गुना हो गई। जाम की विकट समस्या, सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट में रोज औसतन ५ दुर्घटनाएं होती हैं। बिजली की समस्या ? टैक्स चुकाने में अव्वल नंबर पर आने वाला शहर, सबसे ज्यादा राजस्व चुकाने वाला शहर, इतना पिछड़ा क्यूँ ? बताने की जरूरत नहीं है कानपुर क्या था क्या हो गया, और क्या होगा।
यहाँ के नेता सिर्फ मू से बक चक करते है, शहर को कूड़ा बना दिया, खुद भी मिटेंगे दूसरों को भी मिटायेंगे कसम खा रखी है विकाश नहीं विनाश की।